यह पाठ्यक्रम उन साधकों के लिए है जिन्होंने आधारभूत शाबर मंत्र साधना पूर्ण कर ली है और गहन अभ्यास की ओर बढ़ना चाहते हैं। इसमें दीर्घ जप-अनुष्ठान, विशेष मुद्राएँ, न्यास, यंत्र-स्थापना तथा साधना-काल की कठिन मर्यादाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है।
गुरु व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक साधक की प्रगति देखते हैं और अभ्यास को उसकी क्षमता के अनुसार निर्धारित करते हैं। यह उच्च स्तरीय आध्यात्मिक शिक्षा है — इसमें धैर्य, संयम और निरंतरता अनिवार्य है।

